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सुर गंगा संगीत महोत्सव: मालिनी अवस्थी के लोक गीतों पर थिरके काशीवासी

  • 28/04/2017

भैंसासुर घाट पर चल रहे सुरगंगा की सातवीं निशा लोक कला व लोक संगीत के युगपुरूष भिखारी ठाकुर को समर्पित रही। यूनेस्को द्वारा आयोजित क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क, नगर निगम और सामाजिक संस्था पहल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सुरगंगा संगीत महोत्सव की लोकसंगीत निशा में प्रख्यात उपशास्त्रीय गायिका मालिनी अवस्थी और भोजपुरी गायक मोहन राठौर के लोकगीतों की धूम रही। उनके गीतों ने हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया।

लोक गायिका मालिनी ने जब मंच संभाला तो श्रोताओं ने हर- हर महादेव के उद्घोष से उनका अभिनन्दन किया। उन्होंने ‘होरी खेले मशाने में‘ ‘रेलिया बैरन पिया को लिये जाये रे' गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब आनन्दित किया। उसके बाद उन्होंने सुकमा में मारे गये जवानों को श्रद्धाजंली अर्पित करते हुए गीत ‘हमारे देशवा के शान हमारे देशवा के जवान‘ प्रस्तुत किया। उसके बाद उन्होंने ‘गोदनवा गोदईबे रे सुन्दर' सुदूर भूमि में मोरे प्राण बसे रे बटोहिया‘, ‘सेजिया पर लोटे काला नाग हो, कचैड़ी गली सून कईला बलमू‘ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं संदेश के तहत गीत सिया के जन्म भयो नामक सोहर गीत भी प्रस्तुत किया। कजरी गीत चम्पारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष को समर्पित करते हुए ‘प्रीतम चलू में तुम्हारे संग जंग में पकडूंगी तलवार‘ पेश कर उन्हें भी नमन किया। समारोह की दूसरी प्रमुख प्रस्तुति देने आये प्रख्यात भोजपूरी गायक मोहन राठौर के गानों ने भी खूब धमाल माचाया। उनके गानों को सुनने के लिए युवाओं में खासा उत्साह रहा। उन्होंने ‘नीमिया की डारी मईया मोरी‘ पचरा से गायन की शुरूआत की। उसके बाद चैती गीत ‘पिया निर्माेहीया हे रामा‘ पेश कर माहौल को अलग ही रंग दे दिया। उसके बाद उन्होंने भिखारी ठाकुर द्वारा रचित विदेशिया गीत ‘पियवा गईने कलकतवा रे सखिया‘ प्रस्तुत किया। इसके अलावा ‘ये सईया जेहीया से गईला पूना‘ आदि गानो की सुमधुर प्रस्तुति दी। समारोह की पहली प्रस्तुति झारखण्ड बोकारो से आई गायिका रंजना राय ने दी। उन्होंने सबसे पहले बधाई गीत ‘गंगा द्वारे बधईया बाजे‘ प्रस्तुत किया, उसके बाद ‘कोयल बिन बगिया ना सोहे राजा‘ गीत की प्रस्तुति दी। समारोह की दूसरी प्रस्तुति गायिका सरोज वर्मा की रही। उन्होंने सबसे पहले ‘तर - तर चुवे पसीनवा‘ प्रस्तुत किया और फिर ‘जिया धक - धक‘ गीत प्रस्तुत किया। सुरगंगा की तीसरी प्रस्तुति गोविन्द गोपाल ने दी। उन्होंने धार्मिक भोजपूरी गीतों की मनभावक प्रस्तुतिया दी। उन्होंने पहले ‘इहो माई‘ और उसके बाद ‘हमरा काशी में‘ और अन्त में ‘मैहर घुमावेली‘ प्रस्तुत कर भक्तिगीतों से श्रोताओं को सराबोर किया। चौथी प्रस्तुति वाराणसी की ही गायिका शैलबाला की रही। उन्होंने सबसे पहले ‘नन्दो से हो गईल लड़ाई ए बाबू कजरौटा के पीछे‘ प्रस्तुत किया। उसके बाद सेना के जवानों को समर्पित ‘बहोत बहादुर सेना के जवान‘ पेश कर जवानों को स्वराजंली अर्पित की। इसके बाद प्रख्यात भोजपूरी गायक नीरज सिंह ने मंच संभाला और मनभावक भोजपूरी गीतों की बयार बहायी। उन्होंने काशी पर आधारित ‘बम बम बोल रहा है काशी‘ और ‘वाह रे बनारस‘ प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब लुभाया। अगली प्रस्तुति गायिका डा. अंजू भारती ने दी। उन्होंने सबसे पहले ‘भजन बाजे दुआर‘ और उसके बाद ‘हे जनक रउरे मढ़वा में हीरा जड़ी‘ गीतों की प्रस्तुति दी। उसके पूर्व सौरभ मिश्र ने सुरगंगा थीम सांग प्रस्तुत किया। समारोह का शुभारंभ नित्य की भाॅति केन्द्रीय देवदीपावली महासमिति के तत्वावधान में आयोजित गंगा आरती के साथ हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी सुनील ओझा रहे। समारोह के अन्त में प्रसिद्ध अभिनेता और चार बार के सांसद रहे विनोद खन्ना को श्रद्धाजंली अर्पित किया गया। कार्यक्रम का संचालन रतिशंकर त्रिपाठी, अरविन्द मिश्रा, जगदीश्वरी चैबे, घनश्याम सेठ, अपूर्वा एवं ओजस्वी ने संयुक्त रूप से किया। भोजपूरी से अश्लीलता दूर करने की कोशिश - मोहन राठौर सुरगंगा का मंच लोक संगीत को बढ़ावा देने का सर्वोत्तम मंच बनकर उभरा है। यहाॅ भोजपूरी को जगह मिलना बड़े ही सम्मान की बात है। यह कहना है प्रख्यात युवा भोजपूरी गायक मोहन राठौर का। उन्होंने कहा कि भोजपूरी को अश्लीलता की वजह से बदनाम किया जाता है। लेकिन आज के कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि भोजपूरी में सिर्फ अश्लीलता और फूहड़पन ही नहीं है। बची खुची अश्लीलता को भी जल्द से जल्द खत्म करने का प्रयास कर रहा हूँ।