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यूनेस्को में काशी का नाम शामिल होना परम्पराओं का सम्मान है: मालिनी अवस्थी

  • 28/04/2017

विश्व के मानचित्र में काशी के संगीत को जगह मिलना अत्यन्त हर्ष का विषय है। यूनेस्को ने काशी के महत्व को देर से ही सही पहचाना यह अच्छी बात है। उक्त बातें यूनेस्को द्वारा आयोजित सुरगंगा में बतौर कलाकार भाग लेने आयी उपशास्त्रीय गायिका मालिनी अवस्थी ने कही।

उन्होंने सुरगंगा के सन्दर्भ में कहा कि यहां हर तरह की विधाओं को मंच दिया जा रहा है जो असल मायने में उत्सव की पहचान है। काशी, बाबा विश्वनाथ, गंगा और यहां का संगीत सब सनातन परम्परा से जुड़े हुए है, यूनेस्को में काशी का नाम शामिल होना इन परम्पराओं का सम्मान है। काशी में किसी के साथ भेदभाव नही होता ना ही कलाकारों के साथ और ना ही श्रोताओं के साथ। उन्होंने कहा कि संगीत की कुछ विधाओं और ऋतु गीत पर अस्तित्व का संकट गहरा रहा है यदि उनका संरक्षण करना है तो कलाकारों को प्रस्तुति की पूरी छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारो ने संस्कृति की उपयोगिता को नहीं समझा, जिसका खामियाजा लोक संगीत को उठाना पड़ा। यदि लोक कलाओं को बचाना है तो जिले स्तर पर प्रतिभा को तलाशना होगा।