Share On

मिनी स्‍टेडियम में विवेक सिंह हाकी का शुभारंभ

  • 02/02/2017

वाराणसी। लालपुर स्थित एस्ट्रो टर्फ मैदान पर आज यानी दो फरवरी से प्रारंभ अखिल भारतीय जूनियर हाकी टूर्नामेंट के पहले ही मुकाबले को देख कर लगा कि भारतीय हाकी का भविष्य उज्जवल है. कैंसर से असमय मौत के शिकार ओलंपियन विवेक सिंह अकादमी की स्थानीय टीम के गुरू द्रोणाचार्य गौरीशंकर सिंह मास्टर साहब और कोच जमाल भाई ने किस कदर खिलाड़ियों को मांज कर तैयार किया है, इसका अहसास शिद्दत से तब हुआ जब इस टीम ने साई की राष्ट्रीय टीम को 6-0 से धोकर रख दिया।

सबसे बड़ी बात कि जूनियर स्तर पर बच्चों को एस्ट्रो टर्फ पर खेलने का सुयोग अब मिल रहा है. विवेक अकादमी के बच्चों ने तेज गति, स्किल, दमखम और मनुहारी तालमेल के बल पर साई हास्टल के देश भर के प्रशिक्षुओं को जिस कदर नचाया, वह वाकई देखने योग्य था. यही नहीं पेनाल्टी कार्नर पर ड्रैग फ्लिक पर गोल का भी नजारा दिखा. विवेक के पिता गौरी शंकर सिंह, जिनकी संतानें क्रिकेट, हाकी और बैडमिंटन में देश का नाम रौशन कर चुकी हैं, और जिनमे दो ओलंपियन और शेष सभी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं, पूरे मैच के दौरान साइड लाइन से बाहर बैठ कर अपने पठ्ठों का मार्ग दर्शन करते रहे. वाकई मैच देख कर मजा आ गया। आपके इस नाचीज को साथी पत्रकार शुभाकर दुबे के साथ स्पर्धा के उद्घाटन का सुयोग मिला. मास्टर साहब गौरीशंकर सिंह खुद हाकी और क्रिकेट के जबरदस्त खिलाड़ी रहे हैं. दशकों पहले उनके साथ क्रिकेट मैच भी खेलने का मुझे अवसर मिला करता था. मेरा तो यही मानना है कि गौरी भैया और भाभी जैसे सौ अभिभावक खेल उन्नासक यदि देश को मिल जाय तो भारत के खेल महाशक्ति बनने में देर नहीं लगेगी. पद्म हो या यश अलंकरण यदि पाने का कोई सही मायने में हकदार है तो वो अपने गौरी भैया ही हैं। अनन्य, विवेक, राजन, प्रशांत, राहुल, सीमांत जैसे खिलाड़ी पैदा करने वाले इस युगल को प्रणाम करने को ही दिल चाहता है। यही नहीं परिवार में एक और अंतरराष्ट्रीय हाकी खिलाड़ी फुल बैक सतनाम कौर भी जुड़ चुकी है राहुल को जीवन साथी बनाने के बाद जब देश की ओर से सेंटर हाफ खेलने वाले विवेक को माल्यार्पण करने लगा तब वहां मौजूद सभी के नेत्र सजल हो गए।