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विश्‍व कप में इस इटली की फुटबाल टीम नहीं खेल पायेगी, दर्शकों को लगा गहरा धक्‍का

  • 07/06/2018

खेल समाचार, 7 जून। रूस में 14 जून से शुरू होने वाले फीफा वर्ल्ड कप में अब 7 दिन ही बचे हैं। ऐसे में सभी की निगाहें इसमें भाग लेने वाली टीमों पर लगी हुईं हैं। फुटबॉल प्रशंसक अभी से गणित लगाने लगे हैं कि किस टीम का दावा कितना मजबूत है। वहीं, इसकी भी चर्चा है कि आखिर 4 बार की विश्व कप विजेता इटली और फीफा रैंकिंग की टॉप-10 टीमों में शामिल चिली फुटबॉल के इस महाकुंभ में भाग लेने के लिए क्यों नहीं क्वालीफाई कर सके। इटली ने पहली बार 1934 में फुटबॉल विश्व कप में भाग लिया था, तब से अब तक 84 साल के इतिहास में महज 3 मौके ही ऐसे आए हैं, जब 'अजूरी' के नाम से प्रसिद्ध यह टीम वर्ल्ड कप में भाग नहीं ले सकी है। वहीं, 2015 और 2016 में लगातार दो बार कोपा अमेरिका कप जीतने वाली चिली का भी वर्ल्ड कप में न उतरना प्रशंसकों को निराश कर रहा है। 2010 में फाइनल खेलने वाली नीदरलैंड भी इस वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी है। हालांकि, पेरू इस बार 36 साल बाद विश्व कप में अपनी चुनौती पेश करेगा। विश्व कप में जब भी इटली खेलने उतरी है तब-तब देखा गया कि उसके खिलाड़ी विपक्षी के हिसाब से अपनी रणनीति बदलते रहते थे। इटली के खिलाड़ी स्पेन की तरह सिर्फ छोटे-छोटे पास नहीं खेलते। अगर विपक्षी लंबे पास की रणनीति बनाता तो वे छोटे-छोटे पास करने लगते थे। तभी तो 1990 में लगातार 5 मुकाबलों में उन्होंने कोई गोल नहीं खाया। इस मामले में वे स्विट्जरलैंड के साथ शीर्ष पर हैं। इटली ने 2002 से लेकर 2014 तक लगातार 15 मैच में गोल किए। वे विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में चौथे स्थान (128 गोल) पर हैं। इटली ने 1934, 1938, 1982 और 2006 में खिताब अपने नाम किया। वे ब्राजील के बाद सबसे ज्यादा खिताब जीतने के मामले में जर्मनी के साथ दूसरे नंबर है। इटली के पूर्व कप्तान और गोलकीपर जियांलुइगी बुफोन ने 2006 विश्व कप में लगातार 4 मैच में 460 मिनट तक कोई गोल नहीं खाया था। इस बार टीम के क्वालीफाई न करने पर उन्होंने संन्यास ले लिया। अर्तूरो विडाल और एलेक्सिस सांचेज जैसे स्टार फुटबॉलर वाली टीम चिली इस विश्व कप में नहीं दिखेगी। सांचेज और विडाल ने टीम के लिए कुल 211 मैच खेले और 63 गोल भी किए। लेकिन, इस बार रूस में दोनों अपना खेल नहीं दिखा सकेंगे। 2014 वर्ल्ड कप के बाद से चिली ने दो कोपा अमेरिका टूर्नामेंट जीते। उसने 2015 और 2016 के फाइनल में अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीम को हराया। चिली से ही फाइनल हारने के बाद लियोनल मेसी ने 2016 में संन्यास की घोषणा की थी। हालांकि बाद में अपने राष्ट्रपति की गुहार पर वे वापस टीम में लौटे। चिली 2017 में कैमरून और पुर्तगाल जैसी मजबूत टीम को हराकर कन्फेडरेशन कप के फाइनल में पहुंची थी। जहां उसे जर्मनी के हांथों हार का सामना करना पड़ा। नीदरलैंड की टीम भी इस बार विश्व कप खेलते नहीं दिखाई देगी। 2006 में प्री-क्वार्टरफाइनल, 2010 में फाइनल और 2014 में सेमीफाइनल खेलने वाली टीम इस बार क्वालीफाई नहीं कर सकी। उसकी टीम में आर्जेन रोबेन और वान पर्सी जैसे स्टार खिलाड़ी हैं। वर्ल्ड कप में उनके न होने से फुटबॉल प्रशंसकों को निश्चित ही खलेगा। क्वालीफाइंग दौर में स्वीडन के बाद तीसरे नंबर पर रही डच टीम के कप्तान आर्जेन रोबेन ने 2017 में हार के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह दिया था। 1990 से लगातार सभी विश्व कप में हिस्सा लेने वाली अमेरिकी टीम भी वर्ल्ड कप 2018 के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी है। क्वालीफाइंग दौर के आखिरी मुकाबले में विश्व कप का टिकट पाने के लिए अमेरिका को त्रिनिदाद और टोबैगो के खिलाफ जीत या कम से कम ड्रॉ चाहिए था लेकिन टीम 2-1 से मैच हार गई। इस हार के बाद टीम के कोच ब्रुस एरीना ने इस्तीफा दे दिया था। 1970 में मोरक्को और बुल्गारिया जैसी टीम को हराकर क्वार्टर फाइनल खेलने वाली पेरू की टीम 36 साल बाद वर्ल्ड कप में खेलेगी। पेरू के मैनेजर रिकार्डो गरेसा ने फरवरी 2015 में टीम की जिम्मेदारी संभाली थी। उन्होंने अपनी देखरेख में टीम को कोपा अमेरिका के सेमीफाइनल में पहुंचाया। अब उनकी टीम वर्ल्ड कप में खेलेगी। डोपिंग में फंसे पेरू के 34 वर्षीय स्टार फुटबॉलर पाउलो गुएरेरो की टीम में वापसी हुई है। क्वालीफाइंग राउंड में पेरू की शुरुआत धीमी हुई थी। पहले 7 मैच में वे 4 अंक ही हासिल कर सके लेकिन पैराग्वे और इक्वाडोर को हराने के बाद कोलंबिया के साथ ड्रॉ खेलकर उसने अपनी स्थिति मजबूत की। बाद में न्यूजीलैंड को 2-0 से हराकर वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया।