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ईरान में हिजाब जरूरी होने पर सौम्या ने शतरंज प्रतियोगिता छोड़ी, कहा-खेलों में मजहबी लिबास की जगह नहीं

  • 13/06/2018

पुणे,13 जून। भारत की महिला ग्रैंडमास्टर सौम्या स्वामीनाथन ने ईरान में होने वाली शतरंज चैम्पियनशिप में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। दरअसल, वह वहां अनिवार्य रूप से हिजाब या स्कार्फ पहनने के नियम को अपने निजी अधिकारों का उल्लंघन मानती हैं। यह प्रतियोगिता 26 जुलाई से 4 अगस्त तक ईरान के हमदान में होगी। 29 साल की सौम्या ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है, "मैं जबरदस्ती स्कार्फ या बुरका नहीं पहनना चाहती। मुझे लगता है कि ईरानी कानून के तहत जबरन स्कार्फ पहनाना मेरे बुनियादी मानवाधिकार का सीधा उल्लंघन है। यह मेरी अभिव्यक्ति की आजादी और विचारों की आजादी समेत मेरे विवेक और धर्म का उल्लंघन है। ऐसी परिस्थितियों में मेरे अधिकारों की रक्षा के लिए मेरे पास एक ही रास्ता है कि मैं ईरान न जाऊं। सौम्या ने आगे लिखा है, "हर बार जब वह राष्ट्रीय टीम में चुनी जाती हैं और भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं तो बेहद गौरवान्वित महसूस करती हैं। मुझे बेहद अफसोस है कि मैं इस तरह की एक महत्वपूर्ण चैंपियनशिप में भाग लेने में असमर्थ हूं। एक खिलाड़ी खेल को अपनी जिंदगी में सबसे पहले रखता है और इसके लिए कई तरह के समझौते करता है लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनके साथ समझौता नहीं किया जा सकता। अपने फेसबुक मैसेज में सौम्या ने ऑफिशियल्स पर भी जमकर भड़ास निकाली है। उन्होंने लिखा,"बड़े आधिकारिक चैम्पियनशिप में खिलाड़ियों के अधिकारों को कम तव्वजो दी जा रही है और ये बड़े खेद की बात है। जब सौम्या से ये पूछा गया कि क्या उनके इस फैसले में ऑल इंडिया चेस फेडरेशन उनके साथ है तो उन्होंने कहा, "मैं सबसे ये उम्मीद नहीं कर सकती कि जो मेरी राय हो वही उनकी भी राय हो। सौम्या के नाम वापस लेने के बाद अब एशियन चेस टीम चैम्पियनशिप में भारतीय की ओर से डी. हरिका और पद्मिनी राउत शामिल होंगी। ईरान में ये प्रतियोगिता जीतने वाली टीम वर्ल्ड टीम चेस चैम्पियनशिप के लिए क्वालिफाई करेगी। यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय एथलीट ने इस मसले पर ईरान जान से मना किया हो। इससे पहले 2016 में महिला शूटर हिना सिद्धू भी हिजाब पहनने की नियम के चलते एशियन एयरगन चैंपियनशिप से नाम वापस ले चुकी हैं।